जो आसान था,
वही सबसे मुश्किल था
मुश्किल था एक बार बाहर निकला जाना ।
बाहर
ठंडी हवा थी,
कुत्ते थे,
पेट भर खाना था
बाहर दीवारें नहीं थी ।
मैं तुम्हारे साथ पड़ा रहना चाहता था
तुम मेरे अंदर थीं ।
तुम एक छवि हो
जो तुमने ही मेरी आँखों में बुनी है ।
पार्श्व में सुनाई देती
"ना तुम हमें जानो,ना हम तुम्हें जानें"
की धुन
और
घंटों कमरे में बंद पड़े रहना ।
वही सबसे मुश्किल था
मुश्किल था एक बार बाहर निकला जाना ।
बाहर
ठंडी हवा थी,
कुत्ते थे,
पेट भर खाना था
बाहर दीवारें नहीं थी ।
मैं तुम्हारे साथ पड़ा रहना चाहता था
तुम मेरे अंदर थीं ।
तुम एक छवि हो
जो तुमने ही मेरी आँखों में बुनी है ।
पार्श्व में सुनाई देती
"ना तुम हमें जानो,ना हम तुम्हें जानें"
की धुन
और
घंटों कमरे में बंद पड़े रहना ।
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