जब तुम आँटा गूँथ रही थी
मैं गूँथ रहा था एक साज़िश
पानी में ।
अपने हाथों से खिलाए कौर
और रोता रहा ।
रात भर मैं तोड़ता रहा तुम्हें
जैसे तोड़ी जाती है चट्टान ।
तुम्हारे होंठों से चुराया विष
और घोल दिया जीवन में ।
वो आख़िरी रोटी
आख़िरी पानी
आख़िरी साँसे
आख़िरी प्यार !
मेरे अंदर सदियों से एक नाम गूँज रहा था
उसे मैंने लिख कर नहीं,मार कर मिटाया ।
मैं गूँथ रहा था एक साज़िश
पानी में ।
अपने हाथों से खिलाए कौर
और रोता रहा ।
रात भर मैं तोड़ता रहा तुम्हें
जैसे तोड़ी जाती है चट्टान ।
तुम्हारे होंठों से चुराया विष
और घोल दिया जीवन में ।
वो आख़िरी रोटी
आख़िरी पानी
आख़िरी साँसे
आख़िरी प्यार !
मेरे अंदर सदियों से एक नाम गूँज रहा था
उसे मैंने लिख कर नहीं,मार कर मिटाया ।
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