कमाल है यार |लोग बधाइयाँ दे रहे हैं एक दुसरे को |कुछ ख़ास है क्या आज?कहीं तीन रंगों के गुब्बारे लगाये गए हैं,कहीं लोग बहुत मेहनत कर के अपने स्कूलों और संस्थाओं में जश्न कि तैयारी में लगे हैं |यह सब मज़ा-मस्ती तो ठीक है लेकिन आप तो असल में अपनी गुलामी का जश्न मन रहे हैं |जो व्यक्ति प्रेम करने को आज़ाद नहीं है वह प्रेम के गीत गायेगा |जो देश नहीं चला पा रहे वो भाषण देंगे |आप मणिपुर या असम जाइए,कश्मीर जाइए |वह जाकर मत बोल दीजियेगा कि स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई |छत्तीसगढ़ ही चले जाइए |आप भूल गए होंगे की 16 दिसम्बर को दिल्ली में क्या हुआ था या क्या हो रहा है अभी उन रेपिस्ट्स का ?सोनी सोरी आज़ाद है क्या ?या वह नौजवान जो जेलों में ठूंस दिए जाते हैं यूँही |तेज़ाब की खुले आम बिक्री पर प्रतिबन्ध लग गया है शायद |
यहाँ तो हर घर,हर संस्था का अपना अलग संविधान है,अपने कानून हैं,वही मानने पड़ेंगे|कोई कहता है इज्ज़त दिल से आती है |अरे भाई किसकी इज्ज़त ?उत्तराखंड में कितना काम कर दिया सरकार ने ?यह तो बूँद और गूँज जैसी संस्थाएं हैं जो लगातार काम कर रहीं हैं |पर हमें अपनी आँखें तब तक मूँद कर रखनी हैं जब तक हमारे साथ न हो जाए |तब तक आप जश्न मानिए,देश आज़ाद है,आप भी | मैं या तो आपको बेवकूफ कहूँगा या अति आशावादी |....
यहाँ तो हर घर,हर संस्था का अपना अलग संविधान है,अपने कानून हैं,वही मानने पड़ेंगे|कोई कहता है इज्ज़त दिल से आती है |अरे भाई किसकी इज्ज़त ?उत्तराखंड में कितना काम कर दिया सरकार ने ?यह तो बूँद और गूँज जैसी संस्थाएं हैं जो लगातार काम कर रहीं हैं |पर हमें अपनी आँखें तब तक मूँद कर रखनी हैं जब तक हमारे साथ न हो जाए |तब तक आप जश्न मानिए,देश आज़ाद है,आप भी | मैं या तो आपको बेवकूफ कहूँगा या अति आशावादी |....