Monday, January 12, 2015

एक लड़की जिससे मैं टकराया था जीवन में

तुम्हारे पैरों में बहुत सारे सपने ला कर रखने थे मुझे 
मैं सपने चुराने निकला था । 

जितनी बार भी लौटो 
घर में वो घर नहीं मिलता जो छोड़ कर आये थे
हमारे अंदर से खाली हो जाते हैं घर 
कहाँ चले जाते हैं लोग ?

मैं बता कर निकला था कि लौटूंगा 
लौटा ज़रूर 
पर मैं नहीं 
मुझमे पता नहीं कौन आकर रहने लगा है । 

जो रह जाते हैं,जा नहीं पाते । 

और एक लड़की जिससे मैं टकराया था जीवन में 
साथ देते-देते जाने कहाँ गुम हो गई है । 

महीने और साल बीतते हैं,समय नहीं । 

मैंने नदी को बहते हुए देखा है 
उसने मुझे बार-बार किनारे पर ला कर छोड़ दिया । 
अब मेरे पास डूबने को समुन्दर है । 

और ठीक-ठीक तो नहीं पर मुझे याद है 
मैं सपने चुराने निकला हूँ । 

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