तुम्हारे पैरों में बहुत सारे सपने ला कर रखने थे मुझे
मैं सपने चुराने निकला था ।
जितनी बार भी लौटो
घर में वो घर नहीं मिलता जो छोड़ कर आये थे
हमारे अंदर से खाली हो जाते हैं घर
कहाँ चले जाते हैं लोग ?
मैं बता कर निकला था कि लौटूंगा
लौटा ज़रूर
पर मैं नहीं
मुझमे पता नहीं कौन आकर रहने लगा है ।
जो रह जाते हैं,जा नहीं पाते ।
और एक लड़की जिससे मैं टकराया था जीवन में
साथ देते-देते जाने कहाँ गुम हो गई है ।
महीने और साल बीतते हैं,समय नहीं ।
मैंने नदी को बहते हुए देखा है
उसने मुझे बार-बार किनारे पर ला कर छोड़ दिया ।
अब मेरे पास डूबने को समुन्दर है ।
और ठीक-ठीक तो नहीं पर मुझे याद है
मैं सपने चुराने निकला हूँ ।
मैं सपने चुराने निकला था ।
जितनी बार भी लौटो
घर में वो घर नहीं मिलता जो छोड़ कर आये थे
हमारे अंदर से खाली हो जाते हैं घर
कहाँ चले जाते हैं लोग ?
मैं बता कर निकला था कि लौटूंगा
लौटा ज़रूर
पर मैं नहीं
मुझमे पता नहीं कौन आकर रहने लगा है ।
जो रह जाते हैं,जा नहीं पाते ।
और एक लड़की जिससे मैं टकराया था जीवन में
साथ देते-देते जाने कहाँ गुम हो गई है ।
महीने और साल बीतते हैं,समय नहीं ।
मैंने नदी को बहते हुए देखा है
उसने मुझे बार-बार किनारे पर ला कर छोड़ दिया ।
अब मेरे पास डूबने को समुन्दर है ।
और ठीक-ठीक तो नहीं पर मुझे याद है
मैं सपने चुराने निकला हूँ ।
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