Friday, December 27, 2013

जो बच सकता है

जो आज था वही कल रहा है
वह मर गया जो फसल रहा है


सर्दियों में हाथ तापने बैठा था  
कैंप में एक बच्चा जल रहा है


आप रहते होंगे समाज में
वहाँ जंगल ही चल रहा है


सियासत में मरे हैं उनके भी
जिन बच्चों का गुल्ली-डंडा चल रहा है


कोई वापस स्कूल भेज दो उनको
देखो तो बचपन गल रहा है


आंकड़ों के खेल में इनके
जो बच सकता है वो टल रहा


इतिहास में झाँक कर देखो
सियासत का यही फल रहा है ।

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