जो आज था वही कल रहा है
वह मर गया जो फसल रहा है
सर्दियों में हाथ तापने बैठा था
कैंप में एक बच्चा जल रहा है
आप रहते होंगे समाज में
वहाँ जंगल ही चल रहा है
सियासत में मरे हैं उनके भी
जिन बच्चों का गुल्ली-डंडा चल रहा है
कोई वापस स्कूल भेज दो उनको
देखो तो बचपन गल रहा है
आंकड़ों के खेल में इनके
जो बच सकता है वो टल रहा
इतिहास में झाँक कर देखो
सियासत का यही फल रहा है ।
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