ग़म-ए-हिज्र कभी तुमको भी हुआ होता
जो हुआ हमारा हाल तुम्हारा भी हुआ होता
घर,मोहल्ला,समाज है और रहेंगे
थोड़ा निडर तुम्हारा प्यार भी हुआ होता
सब समझदार कहते हैं तुमको बहुत
समझ का थोडा हिस्सा मेरा भी हुआ होता
इश्क़ में जितना हुआ है हमारा नुकसान
थोड़ा सा तो तुम्हारा भी हुआ होता
जो हुआ हमारा हाल तुम्हारा भी हुआ होता
घर,मोहल्ला,समाज है और रहेंगे
थोड़ा निडर तुम्हारा प्यार भी हुआ होता
सब समझदार कहते हैं तुमको बहुत
समझ का थोडा हिस्सा मेरा भी हुआ होता
इश्क़ में जितना हुआ है हमारा नुकसान
थोड़ा सा तो तुम्हारा भी हुआ होता
No comments:
Post a Comment