बस अब यह जुबां न खुले
और कोई आरज़ू न पले
बेहतर है अब चुप ही रहें
रिश्तों में और गिरहें न डलें
हमारा ज़ेहन है हमारे ख्याल हैं
यह लड़ते रहें आप फूले-फलें
हम जी लेंगे सवालों के साथ
जवाबों की तलाश में कितना जलें
यह न लिखता ग़र मिल जाते
यह दूरी अब और खले
और कोई आरज़ू न पले
बेहतर है अब चुप ही रहें
रिश्तों में और गिरहें न डलें
हमारा ज़ेहन है हमारे ख्याल हैं
यह लड़ते रहें आप फूले-फलें
हम जी लेंगे सवालों के साथ
जवाबों की तलाश में कितना जलें
यह न लिखता ग़र मिल जाते
यह दूरी अब और खले
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