क्या हवाओं में ही घुल गया है दर्द
आँखों को कोई और काम नहीं मिलता
लोग मिलते हैं यहाँ अय्यारों की तरह
बात करने को हमजाम नहीं मिलता
धूप-छाँव की तरह बदलता है मिज़ाज
भटकते ख्यालों को अंजाम नहीं मिलता
मुकम्मल जहां,ज़मीन,आसमान की बात छोड़ो
तबीयत पूछने को ख़ास-ए-आम नहीं मिलता
किसी ने दिया था हर पल का वास्ता
यूं ही तो कोई सुबह-शाम नहीं मिलता
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