हम तलाश रहे थे अपना भविष्य
हमारे भी थे घर
हमारी भी थी माँ
दो लोग अगर अपना भविष्य
अपने सपने
साथ में देखते हैं
तो क्या ग़लत करते हैं ?
यह कैसे रिश्ते थे?
कभी हमें बुलाया जा रहा था
कभी हम मांग रहे थे थोड़ा सा समय
और किस से?
जीवन भर साथ रहने की बात करने वाली लड़कियाँ
तय कर रही थी हमारा भविष्य
सुना रही थी फ़ैसले
सहारा लिया जा रहा था
नारीवाद और आज़ादी जैसे शब्दों का
और हम नम आँखें लिए नाप रहे थे सड़कें
लौट रहे थे घर
एक एक करके सालों में संजोये
हर छोटे-छोटे पल में घुसे
हज़ारों सपने टूट रहे थे
बह रहे थे
हाँ हमें लौटाया जा रहा था
हमारे प्यार को दुत्कारा जा रहा था
हमसे झूठ बोले जा रहे थे
मगर हम इतने बेवकूफ थे कि
हमारी आँखों से उनका चेहरा नहीं उतर रहा था
उम्मीद नहीं जा रही थी
मैं कहता हूँ
हम सब को ऐसी हर उम्मीद को दफ्न करना चाहिए अब
सिर्फ एक एहसास के ख़त्म होने से
अगर सब ख़त्म हो जाता है
और कुछ मायने नहीं रखता
तो ऐसे एहसास का पूछा जाना चाहिए मतलब
होनी चाहिए भरपाई हमारे जीवन में आई
उथल पुथल की
ऐसे एकतरफा फैसलों की वजह से
और कितने ख़ूबसूरत चेहरे
यूँ जानवर बन जायेंगे |