वे सब
जिनसे हम प्यार में है
ग़लतफ़हमियों के शिक़ार होते जाते हैं
एक-एक बात
नुकीली कील-सी ठोकते हैं दिमाग़ में
भरते जाते हैं अपनी कुंठाओं का नीला रँग
उनके सीने में
लिपटते हैं,फिर उन्हीं से बचते हैं
फिर उन्हीं को नोचते हैं ।
कैसे-कैसे
हम खुद को बचाते हैं ।
जिनसे हम प्यार में है
ग़लतफ़हमियों के शिक़ार होते जाते हैं
एक-एक बात
नुकीली कील-सी ठोकते हैं दिमाग़ में
भरते जाते हैं अपनी कुंठाओं का नीला रँग
उनके सीने में
लिपटते हैं,फिर उन्हीं से बचते हैं
फिर उन्हीं को नोचते हैं ।
कैसे-कैसे
हम खुद को बचाते हैं ।