Wednesday, April 15, 2015

पर जब वे हँसते हों किसी के रोने पर

नींद में मारे जाते कोड़े 
सोने से लगता डर 

कोयला मेरे गले में 
पर मैं काला नहीं 

कितने अच्छे लगते हैं ना 
हँसते हुए लोग 
पर जब वे हँसते हों किसी के रोने पर !

मोम पिघलता कानों में 
आवाज़ की खनक बढ़ती जाती 

सब रास्ते बंद करके कहा जाता 
वापस लौटो । 

दिमाग़ में घूमता सारा ब्रह्माण्ड 
मेरे ब्रह्माण्ड में एक ही इंसान 

जब आप मेरा नाम पुकार रहे होता हैं 
मैं वहाँ होता ही नहीं 
जूझते हम सपने में 
बचाता कोई । 

यह पागलपन उन्होंने ही दिया 
जो बाद में पूछते पागल क्यों ?


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