नींद में मारे जाते कोड़े
सोने से लगता डर
कोयला मेरे गले में
पर मैं काला नहीं
कितने अच्छे लगते हैं ना
हँसते हुए लोग
पर जब वे हँसते हों किसी के रोने पर !
मोम पिघलता कानों में
आवाज़ की खनक बढ़ती जाती
सब रास्ते बंद करके कहा जाता
वापस लौटो ।
दिमाग़ में घूमता सारा ब्रह्माण्ड
मेरे ब्रह्माण्ड में एक ही इंसान
जब आप मेरा नाम पुकार रहे होता हैं
मैं वहाँ होता ही नहीं
जूझते हम सपने में
बचाता कोई ।
यह पागलपन उन्होंने ही दिया
जो बाद में पूछते पागल क्यों ?
सोने से लगता डर
कोयला मेरे गले में
पर मैं काला नहीं
कितने अच्छे लगते हैं ना
हँसते हुए लोग
पर जब वे हँसते हों किसी के रोने पर !
मोम पिघलता कानों में
आवाज़ की खनक बढ़ती जाती
सब रास्ते बंद करके कहा जाता
वापस लौटो ।
दिमाग़ में घूमता सारा ब्रह्माण्ड
मेरे ब्रह्माण्ड में एक ही इंसान
जब आप मेरा नाम पुकार रहे होता हैं
मैं वहाँ होता ही नहीं
जूझते हम सपने में
बचाता कोई ।
यह पागलपन उन्होंने ही दिया
जो बाद में पूछते पागल क्यों ?
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