Tuesday, May 05, 2015

तू आग देती रहना

सन्नाटा चुभता है कानों में 
बालियाँ भी 

रात है अँधेरा यहाँ 
उजाला भी 

नल खुला है 
आवाज़ है 
डर गिरता है बाल्टी में 
पीता भी हूँ 
नहाता भी 

मेरी एक दुनिया है 
तुझसे भरी 
तुझसे फ़ना 

ठंडक है 
तू आग देती रहना । 

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