सन्नाटा चुभता है कानों में
बालियाँ भी
रात है अँधेरा यहाँ
उजाला भी
नल खुला है
आवाज़ है
डर गिरता है बाल्टी में
पीता भी हूँ
नहाता भी
मेरी एक दुनिया है
तुझसे भरी
तुझसे फ़ना
ठंडक है
तू आग देती रहना ।
बालियाँ भी
रात है अँधेरा यहाँ
उजाला भी
नल खुला है
आवाज़ है
डर गिरता है बाल्टी में
पीता भी हूँ
नहाता भी
मेरी एक दुनिया है
तुझसे भरी
तुझसे फ़ना
ठंडक है
तू आग देती रहना ।
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