Saturday, May 17, 2014

एक युग तो बीत गया

जब भरोसे जैसे शब्दों की
अहमियत बची होगी
छल-कपट जैसे शब्दों के भी
कुछ मायने होंगे
किसी और सदी में
सतयुग से भी सच्चे  
किसी और युग में
हम करेंगे प्रेम ।


इसी तरह
हम कुछ महीनों के अंतर
में जन्म लेंगे
मैं बचपन से होऊंगा तुम्हारे साथ
तुम्हें समझने के लिए
मैं मान जाया करूँगा तुम्हारे
एक बार मनाने से
तुम्हें भी मौका मिलेगा
रूठ जाने का
जब मैं करने लगूंगा कुछ काम
और तुम डरना छोड़ दोगी
हम करेंगे प्रेम ।


जब हम पी पाएँगे
एक दूसरे की पीड़ा
लिपट सकेंगे
जब मन चाहे
शहर और काम
नहीं कर पाएंगे हमें दूर
जब खुली सडकों पर
बेबाकी से घूम पाएंगे

कर पाएंगे अपने नामों के
मतलब को सार्थक
हम करेंगे प्रेम ।
जब तुम निभा चुकी होगी
सारी ज़िम्मेदारियाँ
और मैं बिता चुका होऊँगा
एक पूरा एकांत भरा जीवन
हम जानेंगे
साथ रहना कैसा होता है
मुझमे होगी इतनी समझ
कि मैं रहूँगा आस-पास
तुम्हें चले जाने से बचाने के लिए  
नहीं लिखनी पड़ेंगी
मुझे रोते हुए कविताएं
हम करेंगे प्रेम ।


कि एक युग तो बीत गया
तुम्हारे मेरे प्रेम का ।  

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