“प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ”
तुम्हारी लिखाई में अंकित
तुम्हारा नाम और पुस्तक मेला 2012
तुम्हारा नाम भी वो जो उस समय
तुम खुद को मुझ से जोड़ कर सोचा
और लिखा करती थीं
ऐसी बहुत किताबें हैं मेरे पास
जो मैं छुपा देना चाहता हूँ
कितना ज़रूरी होता है ना छुपाना
हमसे बेहतर कौन जानेगा
मैं कभी उन किताबों पर अपना नाम
नहीं लिख पाया जो मैंने तुम्हे दीं
मेरे नाम के साथ तुम उन्हें कैसे ले कर जाती
घर
हमें छुपाना था ना
तस्लीमा नसरीन की “दुखियारी लड़की”
देते हुए फ़ेमिनिज़्म के बारे में कहा था तुमने
वो मैने अभी तक नहीं पढ़ी
उस दुखियारी लड़की में अब तुम दिखोगी क्या ?
हम
अनाथ प्रेमी थे
लाचार समय में
प्रेम को छुपाना क्यों पड़ता है
ख़ैर,
तुम्हारी लिखाई बहुत अच्छी है |
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