Tuesday, May 13, 2014

छोटी सी ही तो बात है


तूने कलाईयों के कंगन बदले हैं शायद
     आँखों का काजल पोंछा है शायद
     या आँखें ही बदल ली होंगीं
     तूने तारीखें बदली हैँ  
     कानों में पड़ने वाली आवाज़ बदली है
     बिस्तर की वो सिलवटें बदली हैं
     या वो चादरें फूँक दी होँगी
     
     बहुत शौक है न तुझे
     सिरे से नकार देने का
     प्रेम को
     तीन वर्षों को
     फाड़ कर फ़ेंक देने का उन तोहफों को
     जिनको कभी सीने से लगाये फिरती थी
     और नाज़ करती थी प्रेम पर
     सिर्फ लगाव भर नहीं था
     घरेलू संस्कार ?
     
     …………
     चुभने वाला सच कहूँ ?
     छोटी सी ही तो बात है
     तूने लड़का बदल लिया है ।  

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