सफ़र
आज इस रात जब मैं डरता हूँ
कि तुम्हारे आस-पास
सब ठीक है या नहीं
तुमने कम्बल ठीक से
ओढा है या नहीं
तुम्हे ठंड तो नहीं लग रही
मेरे बारे में सोच कर
तुम ज्यादा परेशान तो नहीं
मेरे तुम्हारे पास न होने की वजह से
वो कचौड़ियाँ तुम्हारे गले से उतरी हैं या नहीं ।
वहीँ
तुम भी शायद डरती होगी
मुझे लेकर
इन्ही सब बातों के लिए।
मैंने ठीक से पहने हैं कपड़े
ओढ़ लिया है तुम्हारा दिया कम्बल भी ।
बीत रही है
यह रात
यहाँ तुम्हारे बिन ।
बीत रही है
यह रात
वहाँ मेरे बिन ।
सुबह ही दे पायेगी
इस रात का जवाब ।
वैसे भी
सुबह ही देती है
हमेशा
रात का जवाब ।
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