माँ
भारी बारिश में
रोज़ की व्यस्तता दिमाग में लिए घर पहुँचने की जल्दी में
कदम तेज़ी से बढ़ रहे थे
कि रास्ते में
एक गली में
एक घर से आती
पराँठों कि खुशबू
माँ की याद दिला गयी
जो व्यस्तता के कारण
कहीं दिल के किसी कोने में
दब गयी थी
खाने का वो स्वाद
याद आते ही
मूंह में पानी तो आया
पर अब तो मैं
वो स्वाद भी
भूल चुका हूँ
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