Wednesday, June 20, 2012

माँ 


भारी बारिश में 
रोज़ की व्यस्तता दिमाग में लिए 
घर पहुँचने की जल्दी में 
कदम तेज़ी से बढ़ रहे थे 
कि रास्ते में 
एक गली में 
एक घर से आती 
पराँठों कि खुशबू 
माँ की याद दिला गयी 
जो व्यस्तता के कारण 
कहीं दिल के किसी कोने में 
दब गयी थी 
खाने का वो स्वाद
याद आते ही 
मूंह में पानी तो आया 
पर अब तो मैं
वो स्वाद भी 
भूल चुका हूँ

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