पापा
जब चलना सिखाया था तुने
तब कहाँ पता था
तू यूं चला जायेगा
जब कंधे पर बिठाकर
यह दुनिया दिखाई थी
तब कहाँ एहसास था
तेरे बिना भी जीना आ जायेगा
तेरा साया मेरी जन्नत था बाबा
अब तू खुद जन्नत में है
आँखों से अश्क बहते तो हैं
पर फिर सोचता हूँ
तू ऊपर से देखता होगा ......
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