Sunday, June 17, 2012

पापा

 

 


जब चलना सिखाया था तुने 
तब कहाँ पता था 
तू यूं चला जायेगा 
जब कंधे पर बिठाकर 
यह दुनिया दिखाई थी 
तब कहाँ एहसास था 
तेरे बिना भी जीना आ जायेगा 
तेरा साया मेरी जन्नत था बाबा 
अब तू खुद जन्नत में है 
आँखों से अश्क बहते तो हैं
पर  फिर सोचता हूँ 
तू  ऊपर से देखता होगा ......

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