बुझती लौ की छटपटाहट से उबरने को …
यह सब ख़ुद को बचाने का एक तरीका है बस। प्रदीप अवस्थी का तरीका । इसे पागलपन भी कहा जा सकता है।
Saturday, June 16, 2012
जो गया
.......
बातें अगर होती
तो गलतफहमियां मिट भी सकती थी
हाथों में हाथ अगर होता
तो मंजिलें मिल भी सकती थी
यह जानते थे
आप भी
हम भी
कि कहीं तो कमी है
कुछ आप में समझ कि कमी थी
कुछ हम में समझ कि कमी थी
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