और मुझे एकदम से याद आया
जबकि मैं कुछ सोचना नहीं चाह रहा था
मैं अब कुछ सोचना नहीं चाहता
कि मेरे पास मेरे बचपन की एक ही फ़ोटो थी
और मैं उसमें ऐसा सीधा दिखता था कि
तुम मुझे यूं मार कर गिरा दोगी
तुम अपनी बचपन की फ़ोटो में भी
बहुत चंट दिखती थीं
मार कर गिरा देने वाली बात
तुमने ही तो कही थी
इस बात पर हम कुछ देर हँसते रहे थे
मुझे वह दोनों फ़ोटो याद आती हैं
और एक पर्स भी
अब मैं कुछ सोचना नहीं चाहता
लेकिन तब
मैं अपने और तुम्हारे बचपन में लौट जाना चाहता था
तुम्हारे साथ बड़ा होना चाहता था
उस घर जाना चाहता था
जहां तुम बार बार अकेली चली जाती हो
तुम्हारे साथ स्कूल जाना चाहता था
पैदल चलते हुए आगे निकल कर,रुक कर,पीछे मुड़ कर
तुम्हारा इंतज़ार करना चाहता था
तुम्हें तो याद होंगे वह रास्ते
मैंने तो कभी देखे ही नहीं
तुम्हें अपने घर ले जाना चाहता था
जिधर जाने वाली ट्रेन में तुम मुझे छोड़ने स्टेशन तक आती थी
हम दोनों दूर तक पटरियों पर नज़र दौड़ाते थे
मुझे दिखता था मेरा घर
तुम्हें मेरा बीता हुआ समय
कितना समय निकल गया था
जो हमने साथ नहीं बिताया था
कितना समय आना बाकी है
जो हमें साथ बिताना था
वो फोटोज़ बड़ी हो गयीं हैं
बूढ़ी भी तो होंगी
पर अब उनकी कोई बात नहीं होती |