तूने कलाईयों के कंगन बदले हैं शायद
आँखों का काजल पोंछा है शायद
या आँखें ही बदल ली होंगीं
तूने तारीखें बदली हैँ
कानों में पड़ने वाली आवाज़ बदली है
बिस्तर की वो सिलवटें बदली हैं
या वो चादरें फूँक दी होँगी
बहुत शौक है न तुझे
सिरे से नकार देने का
प्रेम को
तीन वर्षों को
फाड़ कर फ़ेंक देने का उन तोहफों को
जिनको कभी सीने से लगाये फिरती थी
और नाज़ करती थी प्रेम पर
सिर्फ लगाव भर नहीं था
घरेलू संस्कार ?
…………
चुभने वाला सच कहूँ ?
छोटी सी ही तो बात है
तूने लड़का बदल लिया है ।