लिखे हुए शब्द
बोली गयीं बातें
जिन पलों का कोई साक्षी नहीं होता
ऐसे बिताये हुए पल
मौन और स्थिर तस्वीरें
बहुत सारे पैदल रास्ते
बहुत कुछ बचाने को
रोज़ रोज़ किया हुआ
ज़रा ज़रा सा संघर्ष
और भी तो
कितना कुछ
सब व्यर्थ है
अर्थ है तो सिर्फ
एक ख़ूबसूरत एहसास का
जिसकी नियति है
बदलते जाना
आज किसी के लिए
कल किसी और के लिए
परसों शायद…….
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