Saturday, March 22, 2014

कल किसी और के लिए

लिखे हुए शब्द
   बोली गयीं बातें
   जिन पलों का कोई साक्षी नहीं होता
   ऐसे बिताये हुए पल
   मौन और स्थिर तस्वीरें
   बहुत सारे पैदल रास्ते
   बहुत कुछ बचाने को
   रोज़ रोज़ किया हुआ
   ज़रा ज़रा सा संघर्ष
   और भी तो
   कितना कुछ
   सब व्यर्थ है
   अर्थ है तो सिर्फ
   एक ख़ूबसूरत एहसास का
   जिसकी नियति है
   बदलते जाना
   आज किसी के लिए
   कल किसी और के लिए
   परसों शायद…….

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