Friday, June 22, 2012

सोचने की बात है ....


घर 
गली 
चौराहे 
सरहद 
लोग मर रहे हैं 
किस को महसूस होता है 
एक संसद है 
बहुत सारे नेता हैं 
उन्हें तो 
पता भी नहीं चलता 
या 
पता करना नहीं चाहते ? 
या 
सब पता होता है ?
हंसी मज़ाक करते हैं 
नोट दिखाते हैं 
जूते भी 
फिर दोस्त बन जाते हैं 
जवाब तक नहीं देते 
गुस्सा आता है 
पर गुस्से से काम नहीं बनता 
तब कैसे बनता है ?
सोचने की बात है 
क्या हो रहा है ?

Thursday, June 21, 2012

इंसान 


रात का समय 
एक सड़क 
बहुत सी गाड़ियां 
मस्ती में 
दौड़कर 
सड़क पार करते 
घर को जाते  
कुछ लड़के 
गुज़रती गाड़ियों के 
शोर में 
सड़क किनारे 
बिना बिस्तर के 
कुत्तों के साथ सोते 
"इंसान"

Wednesday, June 20, 2012

माँ 


भारी बारिश में 
रोज़ की व्यस्तता दिमाग में लिए 
घर पहुँचने की जल्दी में 
कदम तेज़ी से बढ़ रहे थे 
कि रास्ते में 
एक गली में 
एक घर से आती 
पराँठों कि खुशबू 
माँ की याद दिला गयी 
जो व्यस्तता के कारण 
कहीं दिल के किसी कोने में 
दब गयी थी 
खाने का वो स्वाद
याद आते ही 
मूंह में पानी तो आया 
पर अब तो मैं
वो स्वाद भी 
भूल चुका हूँ

Monday, June 18, 2012

तकलीफ 

तकलीफ होती है तसव्वरे-जानां से भी 
जिंदगी से तो चले गए दिल से भी चले जाते ....

Sunday, June 17, 2012

पापा

 

 


जब चलना सिखाया था तुने 
तब कहाँ पता था 
तू यूं चला जायेगा 
जब कंधे पर बिठाकर 
यह दुनिया दिखाई थी 
तब कहाँ एहसास था 
तेरे बिना भी जीना आ जायेगा 
तेरा साया मेरी जन्नत था बाबा 
अब तू खुद जन्नत में है 
आँखों से अश्क बहते तो हैं
पर  फिर सोचता हूँ 
तू  ऊपर से देखता होगा ......

Saturday, June 16, 2012


जो  गया .......

बातें अगर होती 
तो गलतफहमियां मिट भी सकती थी
हाथों में हाथ अगर होता
 तो मंजिलें मिल भी सकती थी 
यह जानते थे 
आप भी
 हम भी 
कि कहीं तो कमी है 
कुछ आप में समझ कि कमी थी 
कुछ हम में समझ कि कमी थी

Thursday, March 29, 2012

प्यार

आज जब तुम्हें संशय होता है
कि इस खोखली दुनिया के
ढोंग और दिखावों में पड़कर
कहीं तुम भी बदल तो नहीं जाओगी
स्वार्थी तो नहीं हो जाओगी
नकली रिश्तों का पाखंड
प्यार पर हावी तो नहीं हो जायेगा
वहीँ
यह जान कर
मैं तुम्हें ढाढस तो बंधाता हूँ
तुम्हारे सामने मजबूत तो नज़र आता हूँ
पर अंदर ही अंदर
मरता जाता हूँ
कि
इस ख्याल का तुम्हारे मन में आना
और हमारे प्यार का हार जाना
एक जैसा लगता है
इतना धीरज है तो नहीं
मुझमें कि
सिर्फ तुम्हारा ख्याल रखूं
मुझे मेरा भी ख्याल रखना है
हाँ ! प्यार अथाह है
फिर भी
तुम्हें लगे
कि कहीं कुछ गांठें पड़ गई हैं
तो खोल देना उन्हें
या तोड़ देना
जो तुम चाहो
डोर का एक सिरा लेकर मैं खड़ा दिखुंगा तुम्हें
हमेशा.............
इंतज़ार में...............
..........प्रदीप