तुच्छ मैं था नहीं
चुप था
प्रतीक्षा में
अब मुझे लगता है
मानवता के इतिहास में खुद पर
किया जाने वाला सबसे बड़ा ज़ुल्म है
प्रतीक्षा करना
जब आप हँस सकते थे छोटी-छोटी बातों पर
खेल सकते थे घर के छोटे बच्चों के साथ
बना सकते थे माँ के साथ खाना
कर सकते थे बहुत सारे रचनात्मक कार्य
आप प्रतीक्षा में थे
घूम सकते थे अकेले भी
पहाड़ियों पर,बर्फ में,बारिशों में
जला सकते थे दीपक
लगा सकते थे नए पौधे
आप प्रतीक्षा में थे
बांधे जा सकते थे अकेले भी
मन्नत के धागे
पर एक पागलपन लिए थे
और समाज के आगे होना था
नतमस्तक
वही देता था स्वीकृति
न अंदर जाने की इजाज़त
न मुड़कर जाने की हिम्मत
कब तक और कैसे
खड़ा रहे कोई
खुले दरवाज़े पर
कोई इस जगह का नाम बता दे
जहां खड़ा हूँ मैं
यहाँ से कहाँ जाया जाता है ?
चुप था
प्रतीक्षा में
अब मुझे लगता है
मानवता के इतिहास में खुद पर
किया जाने वाला सबसे बड़ा ज़ुल्म है
प्रतीक्षा करना
जब आप हँस सकते थे छोटी-छोटी बातों पर
खेल सकते थे घर के छोटे बच्चों के साथ
बना सकते थे माँ के साथ खाना
कर सकते थे बहुत सारे रचनात्मक कार्य
आप प्रतीक्षा में थे
घूम सकते थे अकेले भी
पहाड़ियों पर,बर्फ में,बारिशों में
जला सकते थे दीपक
लगा सकते थे नए पौधे
आप प्रतीक्षा में थे
बांधे जा सकते थे अकेले भी
मन्नत के धागे
पर एक पागलपन लिए थे
और समाज के आगे होना था
नतमस्तक
वही देता था स्वीकृति
न अंदर जाने की इजाज़त
न मुड़कर जाने की हिम्मत
कब तक और कैसे
खड़ा रहे कोई
खुले दरवाज़े पर
कोई इस जगह का नाम बता दे
जहां खड़ा हूँ मैं
यहाँ से कहाँ जाया जाता है ?
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