"शूटआउट एट वडाला"फिल्म देखते समय और देखने के बाद यही एक बात थी जो मेरे दिमाग में रह गयी | बात जितनी सीधी है उतनी ही नज़रंदाज़ हो जाने वाली भी | मेरे लिए बहुत आवश्यक है फिल्म को ज़िन्दगी से जोड़कर देखना |कहीं न कहीं हम सब के बहुत अंदर दबी हुई यह इच्छा होती है कि हम पर बहुत अत्याचार हो,हम रोयें,टूटें,हार जाएँ | फिर लड़ें,संघर्ष करें और जीतें | हम खुद वह नायक हो जाना चाहते हैं जो उसूलों का पक्का है,चुपचाप सीधी ज़िन्दगी जीना चाहता है ,जो पढाई करता है,जिसका बाप मर चुका है,जिसको अपनी माँ का ख्याल रखना है और जिसकी ज़िन्दगी में एक लड़की भी है जो कहती है कि वह उससे बहुत प्यार करती है |
हम सब जब अपने घरों से पहली बार बाहर निकलते हैं तो ऐसे ही तो होते हैं-सीधे,मासूम,भोले| बहुत कुछ कर जाना चाहते हैं| बहुत सारे उसूलों की चादर ओढ़ कर निकलते हैं,ऐसे उसूल जिन्हें न तो हम पूरी तरह अपना पाते हैं न छोड़ ही पाते हैं | फिर बाहर निकल कर हम सीखते हैं दुनियादारी,हमें मिलते हैं धोखे,हम देने लगते हैं धोखे| हम सीख लेते हैं चालाक होना | हम सीख लेते हैं बदला लेना | हमें दिखता है खून | हमें चाहिए होता है खून |हम दूसरों के साथ ग़लत होता हुआ देखते हैं और चुप रहते हैं | हमारे साथ ग़लत होता है तब भी चुप ही रहते हैं | लेकिन हमें खींच लिया जाता है कि साले तुम लड़ो और वही बन जाओ जो कभी नहीं बनना चाहते थे |और फिर हम जीते हैं बदले कि ज़िन्दगी |
हमारे हाथों में होती है ताकत,हम जानवरों की तरह लड़ते हैं और मार देते हैं सामने वाले को और बन जाते हैं राक्षस | फिर हम अपनाते हैं तरीके जो भले ही ग़लत हो पर अपने होते हैं |ऐसे में जिनसे साथ की सबसे ज्यादा उम्मीद होती है वही दुत्कार देते हैं क्योंकि उन्हें राक्षस पसंद नहीं | छुट जाता है हमारा प्यार |और हम जितने ताकतवर होते हैं उतने ही बेवकूफ भी |
जहां तक फिल्म कैसी है का सवाल है तो मेरी राय यह है कि एक बार देखी जानी चाहिए | मेरी राय यह भी है की फिल्म देखकर खुद अपनी राय बनायेंगे तो आप एक अच्छे दर्शक भी बन पाएंगे |
फिल्म अभिनय का ज्यादा मौका नहीं देती | तीन आइटम गाने वैसे तो ज्यादा लगते हैं पर अगर गैंगस्टर्स की बात की जाए तो यह शायद उनकी ज़िन्दगी का जरुरी हिस्सा है | इस फिल्म का शूटआउट पिछली फिल्म "शूटआउट एट लोखंडवाला " जितना प्रभावित नहीं करता |यह सच है कि फिल्म में गालियाँ बहुत हैं पर यह भी सच है की यह एक सच है |आप ऐसे गैंगस्टर्स की कल्पना नहीं कर सकते जो गालियाँ न देते हो |
इस तरह बर्बाद होती हैं जिंदगियां और हम सबको सब पता होता है लेकिन कोई कुछ
कर नहीं सकता | सच की पड़ताल न आज तक कभी हुई है और न कभी होगी | बस जब तक
खुद के साथ कुछ नहीं होता तब तक जिए जाना है |किसी ने कहा तो नहीं है मैं
ही कह देता हूँ-"मैं ऐसे जीता हूँ जैसे तैयार हूँ मरने के लिए "|
पर मैं एक बात और सोचता हूँ - मान्या सुर्वे के साथ कुछ ग़लत नहीं हुआ होता तो उसके नाम का इतिहास ही नहीं बनता | उसकी ज़िन्दगी बर्बाद हुई और इतिहास बन गयी | पर ऐसी बहुत सी जिंदगियां हैं जो बर्बाद हैं और गुमनाम हैं |
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